Captain Mathew The Seafarer, My School Buddy

The sea is vast and quiet as it could be

Semblance of life in boats and ships around

Sound of splashing waves onto my ship do not

Kill the loneliness so strong in the air

I sail along, port to port

In circle towards my shore

Thus spoke a seafarer

To whom and to all of them, the world owes, but does not acknowledge

A huge debt of gratitude

Day of Friendship, every day, for friend(s) true

गर अल्फ़ाज़ ही एहसास की ज़रूरत हैं
फिर दिल से निकले जज़्बातों का क्या मतलब

तू तो दोस्त हमेशा से दिल से है मेरा
जज़्बातों का एहसास गर हो तुझको तो फिर अल्फ़ाज़ों से इज़हार क्यों करना

हर दिन है दोस्ती का, कोई एक दिन ही क्यों तुझको में दोस्ती की मुबारकबाद दूँ
रिश्ता है दिल का, ऐ दोस्त, हर दिन ये दोस्ती मुबारक रहे

और हाँ
गर कल हो नहीं या कल मैं ना रहूँ
याद फिर भी मुझको रखना तू
दोस्ती उस वक्त तक ज़िंदा रहेगी
दोस्त जब तक है जान किसी एक में भी

ना ख़त्म होने वाला मसला

सोचने की कुव्त फ़िलहाल शायद छुट्टी पर है
इतने सारे मसले मसाइल वैसे ही मेज़ पर हैं

उनको सुलझाऊँ कैसे ये बन जाएगी एक और सोच नयी
किस कोना-ए-मेज़ पर इसको रखूँ? ये भी एक इज़ाफ़ा-ए-सोच है

बेहतर तो ये होगा के मेज़ पर पड़े काग़ज़ों पर ही कुछ गौर-ए-ज़ेहन करूँ
शायद फिर कोई नयी सोच के लिये कुछ जगह बने

कल ग़म से मुलाक़ात हुई शाम के ढलते

कल ग़म से मुलाक़ात हुई शाम के ढलते 

पूछा उसने मुझसे एक अरसा हुआ एहसास किया नहीं तुमने मुझको ऐ जलील

मैंने भी कहा, ऐ ग़म 

तू ही तो था जिसने मुझको बे-गमी की राह दिखाई 

अब ख़ुशी से मुलाक़ात हो गयी है 

ख़ुशी ख़ुशियों में तब्दील हो गयी है 

गर तू लौट कर भी आना चाहे ऐ ग़म मेरी ज़िंदगी में

मेरी ख़ुशियाँ ही तुझको निपट जाएँगे 

ऐ ग़म, अब ढूँढ कोई काम और बेहतर तू 

या फिर ढूँढ कमज़ोर कोई और तू 

ख़ुशियों ने मेरा हौसला बुलन्द किया हुआ है 

अब डर लगता नहीं पेचीदा ज़िंदगी से 

जी लूँगा जिस हाल में भी मुक़द्दर ने लिखा है मेरा मुस्तक़ाबिल 

साथ है ख़ुशी का जीने के लिए

बाक़ी सब तो ला हासिल है