कश्मकश में रहता है हर वक़्त क्यों 

अपनी सोच पर तू क़ाबू कर ले ऐ कम-जलील 

जद्दोजहद रोज़ करनी होगी तुझको खुद से ही 

खुद पर फ़तह कर ले, जमाने से फिर तुझको कोई डर नहीं

O my uneasy mind, in conflict with itself 

Indulge not in wavering thoughts 

It’s a struggle everyday within yourself 

The uneasy mind conquered, would have no fear of the pain that fate may bring about